वीरता - बलिदान के प्रतीक चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस मनाया गया

वीरता - बलिदान के प्रतीक चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस मनाया गया ।

मेट्रो एजुकेशन एकेडमी विद्यालय थांदला में बलिदानी चंद्रशेखर आजाद जी का बलिदान दिवस मनाया गया इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका सोनम सिंगार द्वारा विद्यार्थियों को बलिदानी चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुवे बताया कि चंद्रशेखर आजाद की आज 27 फरवरी को 95वीं पुण्यतिथि पर हम सब नमन करते हैं।आजाद एक ऐसे सपूत का नाम है जिन्होंने अपने देश के प्रति पूर्णरूप से अपना जीवन समर्पित कर दिया । हम सब गौरवशाली है कि ऐसे महान क्रांतिकारी का जन्म अपने झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था जो अब अलीराजपुर जिले में है।गांव की गलियों में बचपन की मौज मस्ती को छोड़कर भूख प्यास की परवाह किए बिना अपनी भारत माता की आजादी के लिए निकल पड़े। जब अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग में आजादी के सुर बुलंद करते हुवे गिरफ्तार हुवे तो जज के सामने पेश किया गया तो जज ने नाम पूछा तो निडर हो कर बोले कि मेरा नाम आजाद है,पिता का नाम स्वतंत्रता और अपना घर जेल बताया इस अबोध बालक के देशभक्ति और अदम्य साहस से घबराकर जज साहब ने आजाद को पंद्रह बेंत की सजा सुनाई। इस सजा पर आजाद मुस्कुराए और हर एक बेंत की मार पर भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलते हुवे पूरे वातावरण को ओज से गुंजायमान कर दिया। ऐसे व्यक्तित्व को आज हम श्रद्धा के फूल अर्पित करते हैं। जिनके हृदय में सदैव देश भक्ति की आग धड़कती रहती थी । उनकी पुण्यतिथि आज भी हमें तेजोमय जीवन की स्मृति में झुकने और उनके अधूरे संकल्पों को पूर्ण करने का आह्वान करती है। इस अवसर पर विद्यालय के संचालक भूषण भट्ट द्वारा शहीद चंद्रशेखर आजाद के चित्र पर मल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा भी आजाद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई । इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, शिक्षिकाए भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरुण शर्मा द्वारा किया गया